जस्ट फ्यूचर्स फेलोसिप (जेएफएफ)

न्यायपूर्ण समाज खातिर नया कथा के सृजन : नेपाल के दलित महिला आ कोभिड-१९

समता फाउंडेशन, नेपाल

दक्खिन एशिया के जात-व्यवस्था, ओह पर आधारित विभेद आ छुआछूत मानव सभ्यता के की क्रूर सच्चाई ह । ओइसन व्यवस्था के पेनी में बाड़ी दलित महिला । दलित महिला होके जिअला पर थाह लागेला— जात-व्यवस्था में दलित महिला भइल का ह ? ओइसे त एह व्यवस्था से कौनो समुदाय के महिला अछूता नइखी । काहेकि समूचे महिलन के शरीर ही जात-व्यवस्था के टिकाके राखेवाला मजबूत अस्त्र ह । जात पर आधारित पवित्रता आ श्रेष्ठता कायम करे खातिर महिला के यौनिकता पर नियंत्रण कइल जाला । ओहीसुके जात-व्यवस्था समझे खातिर लैंगिकता के बारे में आ लैंगिकता समझे खातिर जात-व्यवस्था के बारे में जानल जरूरी बा । एह दूनू पक्ष के आपसी संबंध जब तक समझ में ना आई, अइसन गंभीर विषय के समझ अधूरे रही ।

जस्ट फ्यूचर्स फेलोशिप (जेएफएफ) का  ?

जात-व्यवस्था पर आधारित विभेद के केंद्र में राखके समता फाउंडेशन ‘जस्ट फ्यूचर्स फेलोशिप (जेएफएफ) के नाम पर बहिन-वृत्ति समूह बनावे के विशेष पहल शुरू कइले बा । एही क्रम में सिर्जनशील महिलन के ‘जस्ट फ्यूचर्स फेलोशिप (जेएफएफ)’ देहल जाई । प्रदेश नं. २ के १६ जने दलित, खास कके २० से ४० बरीस तक के महिला के ‘जस्ट फ्यूचर्स फेलोज (जेएफएफ)’ के रूप में आत्मविकास खातिर ८ से १० जने
‘विश्वव्यापी सामाजिक न्याय के रूपांतरणकारी (जीएसजेसीएम)’ का साथे सहकार्य कइल जाई । ई फेलो लोग में जात-व्यवस्था का बारे में ज्ञान बढ़ावेला, आलोचनात्मक सवाल करे में आ नया ढङ से जात का बारे में पुनः कल्पना करे में सहयोग पहुँचावेला आ ओह लोग में रहल प्रतिभा आ क्षमता के निखारेला ।

फेलो लोग कला आ मानविकी के क्षेत्र में जात के सवाल का बारे में नया कथा के रचना आ रहल कथा के भी फरक दृष्टिकोण से फेर से रचना कइल करेलन । ऊ लोग नेपाल के भीतर आ बाहर के सिर्जनशील व्यक्तित्वन से लेके भू-सतह पर क्रियाशील रूपांतरणकारी व्यक्तित्वन से सहकार्यो कइल करेलन । एही सहकार्य के परिणाम स्वरूप मौखिक इतिहास, संस्मरण, आत्मकथा, कलाकृति, परंपरागत चित्रकला बिनी लोग । ओहीतरे कविता, गीत, संगीत, छोट फिल्म, सार्वजनिक सूचना, मातृभाषा-राष्ट्रभाषा में पोडकास्टो उत्पादन होई ।

ऊ सामाजिक न्याय के रूपांतरणकारी लोग कोरोना महामारी के बीच विष्फोटक भइल जात-व्यवस्था के गहिराई में पहुँचके चिरफार करी आ दलित महिलन पर जात-व्यवस्था के थोपल तीत अनुभव आ ओकरा विरुद्ध ओकनी के प्रतिरोध का बारे में संवाद करत आपन मझदारिओ बढ़ाई लोग ।

जस्ट फ्यूचर्स फेलोशिप (जेएफएफ) काहे ?

जात-व्यवस्था से संसार के २३ करोड़ से बेसी दलित लोग प्रभावित बा । नेपाल में जात-व्यवस्था का बारे में गंभीर अध्ययन-अनुसंधान के सीमितता के कारण जातपात कहल छुआछूत मात्रे मानल गइल बा । जाने-बुझेवाला लोग भी लिखल आ कहल करेलन, ‘दलिते लोग में हीन भाव बा, दलित लोग का भीतरे छुआछूत बा, छुआछूत त अनपढ़ लोग करेलन, पढ़ल-लिखल लोग ना करेलन, भेदभाव त गाँव में मात्रे बा, शहर में नइखे, ई मानसिकता के बात ह, एके रात में ना हटी, जातपात काल़ रहे, आज नइखे ।’ अइसन विश्लेषण जात-व्यवस्था के बारे में निमन से अध्ययन करे खातिर उत्प्रेरित ना करेला ।

मिडिओ में दलित पर बलात्कार, यौन-हिंसा आ दुर्व्यवहार, शारीरिक दंड, डर-धमकी, विभेद के समाचार मात्र अधिक आवल करेला । अइसन समाचार दलित महिला के आउर पीड़ित बनइले लउकेला । साहित्यो में कके खाएवाला दलितन के माङके खाएवाला भा गिरहत-महाजन के दया-माया पर जिएवाला निरीह-पात्र के रूप में चित्रण करे के चलन बेसी देखल जाला । लामा समय से दलित लोग दलन आ हिंसा के शिकार भइल लोग, बहुतो अवस्था में दलन आ हिंसा सहे पर मजबूर भइल लोग । कइअन बेर त ओह लोग के ओकरा विरोध में मौलिक कला के जरिए संघर्षो कइल इतिहास बा । दलितन के गीत-संगीत, कला, हुनर, संस्कृति, स्मृति आ मौखिक इतिहास दलित के समग्र जीवन के समझे में सहयोग करेला ।

लामा समय तक पढ़े-लिखे से वंचित कइल गइल दलित लोग के आपन दृष्टिकोण के केंद्र में राखके लिखल इतिहास पातर लउकेला । मधेशी दलित महिला के संघर्ष का बारे में आउरो कम लिखल आ सुनल मिलेला । एकर अर्थ ओह लोग के इतिहासे ना भइल नइखे । समुदाय के जीवंत अनुभव समाज आ राज्य के व्याकरण समझेके सिखावेला । संघर्ष के कथा के कहेला, कइसे कहेला, काहे कहेला, कहिआ कहेला ? इहे सवाल समाज आ राज्य के व्याकरण बुझे आ लिखे में सहयोग करेला । दलित महिलन के अनुभव, स्मृति, रोदन, चित्कार, सपना आ प्रतिरोध के शब्द में समीटल आसान नइखे, काहेकि ओह सब के क्षेत्रफल बहुते फइली बा । ओह लोग के संघर्ष-कथा नेपाल के दलित महिला संघर्ष, मूलधार के महिला आंदोलन आ दलित
आंदोलन खातिर मात्र नइखे, बदलत विश्व खातिर भी बड़ा अर्थ आ महत्त्व राखेला ।

अभीन दलित समुदाय मात्रे नइखे, सौंसे मानव समाज ही कोरोना महामारी से जुझ रहल बा । धनिक-गरीब, ऊँच-नीच के खाई गहिँड़ आ फइली भइल विश्व में एकरो प्रभाव समुदाय में असमान बा । अइसन अवस्था में समता फाउंडेशन नेपाल के मानव विकास सूचकांक में सब से नीचा रहल प्रदश में, ओहू में दलित महिला सङे सहकार्य कर रहल बा ।

प्रदेश नं. २ के दलित महिलन का साथे लैंगिक आ यौनिक अल्पसंख्यक में से अपना के महिला के रूप में पहचान करेवाली दलित महिलन से सहकार्य काहे ?

नेपाल के कूल जनसंख्या के ५.९% मधेशी दलित बा । ओहू में अधिकतम दलित प्रदेश नं. २ के ८ गो जिलन में बसोबास करेलन । एह प्रदेश के जनसंख्या में से १८% मधेशी दलित बा, ई बड़का जनसांख्यिक बल ह । ओह लोग में से आधा से अधिक संख्या में रहल दलित महिला सीमांत अवस्था में बाड़ी । ऊ लोग जीविका के खातिर खेत आ घर के काम करेली, बाँकिर ओह सब पर ओह लोग में से बहुतो के स्वामित्व नइखे । ऊ लोग ‘ऊँच जात’ के मालिकन के खेतबारी में सस्ते में मजदूरी करेली । ऊपर से कइअन त आजो बऩुआ मजदूर बने पर बाध्य बाड़ी ।

अइसनो अवस्था में मधेशी दलित महिला हरेक संघर्ष में अपने ढङ से जुड़ल बाड़ी । ऊ लोग वर्ग, क्षेत्र, लिङ, भेष-भाषा, नागरिकता के आधार पर विभेद के विरुद्ध एकेसाथ लड़ रहल बाड़ी । ओह लोग के संघर्ष उचित मेहनताना पावे का साथे सम्मानित जिनगी के खोजिओ ह । शदिओ से छुआछूत, विभेद आ दलन से दलित लोग लड़ रहल बा । कोरोना महामारी के बीच भइल बलात्कार, हत्या आ हिंसा के चल्ते दलितन के नीन हराम बा । महामारी के बाद रोग, भूख आ विभेदो के विरुद्ध जुझला के विकल्प नइखे । मधेशी दलित महिला के पहचाने प्रतिरोध ह, संघर्ष ह । एहू में मुसहर महिला लोग पुरुषन से काऩ में काऩ मिलाके जे संघर्ष कइले बाड़ी ओकर ऐतिहासिक महत्त्व बा । ई भावी पुस्ता खातिर प्रेरणा के श्रोतो ह ।

अइसने संघर्ष के कारण मैथिल भाषा-सभ्यता मजबूत रहल क्षेत्र मानल जाएवाला प्रदेश नं. २ दलन आ प्रतिरोध के प्रमुख केंद्र बन रहल बा । ओकर प्रतिविंब प्रदेश सरकार के नीति-निर्णय में भी देखल जाला । फलस्वरूप प्रदेश नं. २ सरकार कुछ पहल कइले बा । एतहाँ के प्रदेश सरकार नेपाल में पहिल बेर दलित सशक्तीकरण ऐन, २०७५ बनइले बा । प्रदेश नं. २ के प्रहरी के तहत दलित समुदाय के ही नेतृत्व में रहे के हिसाब से ‘जातीय विभेद आ छुआछूत नियंत्रण एकाई’ के व्यवस्था कइल गइल बा । जात के सवाल में राज्य के कानून से समाज के कानून बरिआर रहल अवस्था में इसन कानूनी व्यवस्था के लागू करे खातिर राज्य के दृढ राहेके चाहीं । दोसरा तरफ, ओह संरचना के जात, लिङ आ वर्ग के आधार पर समावेशी बनावल आ ऐन के प्रावधान के जल्दी लागू कइल प्रदेश सरकार के चुनौती त बड़ले बा ।

कानूनी व्यवस्था के कार्यान्वयन आ दलितमुखी नीति-कार्यक्रम बनावे खातिर सड़क आंदोलन के महत्त्व होला, जौन सरकार-प्रशासन के प्रभावित करेला । एकरा खातिर जरूरी बा— दलित समुदाय के संगठित भइल आ संघ-संस्थन के बीच सहकार्य कइल । संस्थागत नेतृत्व भी जरूरी होला । एकरा खातिर बौद्धिक आ सांस्कृतिक पूँजी के लमहर भूमिका होला । एह समूचे पक्ष में दलितन में श्रोत-साधन के अभाव बा ।

एकरा खातिर सामाजिक न्याय के क्षेत्र में काम कर रहल चिंतक आ सिर्जनशील व्यक्तित्वन का साथे हथमेल कके चलल जाला । एही हथमेल का जरिए ओह लोग के ज्ञान, हुनर आ सामाजिक पूँजी के बढ़ावे के पहल कइल जाई । एह पहल से सिर्जना होखेवाला नया कथा बहुतो दलित महिलन के, खास कके मधेशी दलित महिलन के दुःख-पीड़ा के मात्र ना होके, ओह लोग के दैनिक प्रतरोध का साथे जिनगी के सपना आ अनेक
आयाम के खोजी करी । कथा-लेखन सभे खातिर न्याय आ समता भइल समाज बनावे के दिशा में सिर्जनात्मक हस्तक्षेपकारी छोट प्रयास ह । हमनी सिखेके चाहतानी, सखावेके चाहतानी आ न्यायपूर्ण समाज बनावेके चाहतानी ।

अठारह महीना के ‘जस्ट फ्यूचर्स फेलोशिप (जेएफएफ)’ निम्‍नलिखित विषय सिखल जा सकेलाः

1.विषय-विज्ञ के सहयोग से आपन कथा अपने कहे-लिखे के क्षमता तेज कइल ।
2.जात-व्यवस्था पर आधारित विभेद का बारे में आ मधेशी दलित महिलन के संघर्ष का बारे में कथा खोजल, सुनल आ सुनावल ।
3.जात-व्यवस्था का बारे में ज्ञान बढ़ावल, आलोचनात्मक सवाल कइल आ जात के सवाल पर नया ढङ से परिकल्पना कइल ।
4.अपना में रहल प्रतिभा आ क्षमता के उत्खनन करत, स्वीकार करत आपन व्यक्तित्व के विकास कइल ।
5.दलित महिला के जीवन, सिर्जनशीलता आ संघर्ष के उत्सव मनावल ।
6.अंतरराष्ट्रीय तह तक साथी-सङ़ाती बनावत जात-व्यवस्था का बारे में बातविचार कइल आ बहिन-वृत्ति संजाल बनावल ।
7.फेलो लोग का सङे सहकार्य आ समन्वय करत भविष्य के संभावना के दुआर खोलल ।
8.फेलोशिप के अंत में सामाजिक न्याय खातिर दलित कला आ साहित्य महोत्सव में विभिन्न माध्यम से फेलोज के कला के प्रदर्शन कइल ।

फेलोज के सुविधा आ जिम्मेवारीः

1.मासिक १५ हजार रोपेया का दर से १८ महीना तक स्टाइपंड (वृत्ति) मिली ।
2.लगातार १८ महीना तक आवधिक रूप में कार्यशाला में भाग लेवेके पड़ी ।
3.कम से कम हप्ता के ४ दिन के समय एह पहल के देवेके पड़ी । कार्यशाला ऑनलाइन से, सामूहिक आ व्यक्तिगत रूप में संचालित होई ।
4.अध्ययन समूह में सक्रिय रूप से भाग लेवेके पड़ी ।
5.फेलोशिप के अंत में समता फाउंडेशन फेलोज के प्रमाणपत्र प्रदान करी ।

आउर जानकारी खातिर समता फाउंडेशन में फोन नं. ०१-५९०५७१६ भा मोबाइल नं. ९८४६८४६४०० पर संपर्क कर सकेनी । एह पहल के फोर्ड फाउंडेशन इंडिआ, नेपाल, श्रीलंका कार्यालय के सहयोग रहल बा ।